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केजरीवाल और सिसोदिया ‘बरी’ बरी करने वाले स्पेशल जज कौन हैं?जितेंद्र सिंह……

केजरीवाल और सिसोदिया ‘बरी’ बरी करने वाले स्पेशल जज कौन हैं?जितेंद्र सिंह……

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दिल्ली ; स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया है |

ऐसी घटना पहली बार नहीं है जब जज जितेंद्र सिंह के किसी फ़ैसले ने सुर्खियां बटोरी हों |

कानून की बारीकियों पर उनकी पकड़ और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवालों के लियें उन्हें कानूनी हलकों में एक सख़्त जज के तौर में देखा जाता रहा है |

शुक्रवार को अपना फ़ैसला सुनाते हुवें जज जितेंद्र सिंह ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया |
उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ “आपराधिक मंशा” या “साज़िश” के ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रही है |

अदालत ने टिप्पणी करते हुवें कहा, “केवल अनुमानों के आधार पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के ख़िलाफ़ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता”

अदालत मे यह भी कहा गया कि सबूतों की कमी के कारण अभियुक्तों को लंबे समय तक मुकदमे की प्रक्रिया में उलझायें रखना उचित नहीं है |
जज जितेंद्र सिंह कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के ख़िलाफ़ 1984 के सिख विरोधी दंगों (पुल बंगश मामला) की सुनवाई भी कर रहे हैं |

इस मामले में जितेंद्र सिंह पीड़ित परिवारों और गवाहों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दियें हैं |

जितेंद्र सिंह इस मामले में 40 साल बाद चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को सुचारू बनाया और फॉरेंसिक साक्ष्यों (वॉइस सैंपल रिपोर्ट) को रिकॉर्ड पर लेकर यह सुनिश्चित किया कि दशकों पुराने इस मामले में इंसाफ़ की प्रक्रिया पारदर्शी रहे |
अपनी अदालतों में जांच एजेंसियों की कमियों को उजागर करने के लियें जज जितेंद्र सिंह अक्सर चर्चा में रहते हैं |

आबकारी मामले में उन्होंने ‘सरकारी गवाह’ (अप्रूवर) बनाने की सीबीआई की रणनीति पर भी सवाल उठायें |

जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगर जांच की ख़ामियों को भरने के लियें इस तरह के गवाहों का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है |
अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री रहते दिल्ली सरकार ने एक नई आबकारी नीति (आबकारी नीति 2021-22) नवंबर 2021 में लागू की थी |

नई आबकारी नीति लागू करने के बाद दिल्ली का शराब कारोबार निजी हाथों में आ गया था | दिल्ली सरकार ने कहा था कि नई नीति लागू होने के बाद राज्य को मिलने वाले राजस्व में वृद्धि होगी |
लेकिन 22 जुलाई 2022 को दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय सक्सेना ने इस नई एक्साइज़ पॉलिसी की सीबीआई जांच कराने के आदेश दियें थे |

दिल्ली शराब नीति से जुड़े केस में ED और CBI दोनों ने जांच की थी और आम आदमी पार्टी के कई बड़े नताओं को गिरफ़्तार किया गया था |

21 मार्च, 2024 को अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार किया गया था | हालांकि इसी साल उन्हें 12 जुलाई को ईडी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी | मगर ज़मानत मिलते ही सीबीआई ने केजरीवाल को गिरफ़्तार कर लिया था | इस कारण तब केजरीवाल जेल से बाहर नहीं आ सके थे |

इस मामले में दिल्ली के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी उस वक़्त जेल में थे | मनीष सिसोदिया को फ़रवरी 2023 में गिरफ़्तार किया गया था |

26 फ़रवरी 2023 को गिरफ़्तार हुयें सिसोदिया 530 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत लेकर 9 अगस्त 2024 को जेल से रिहा हुयें थे |

इस केस में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी गिरफ्तार किए गयें थे |

संजय सिंह अक्तूबर 2023 में गिरफ़्तार कियें गयें थे | ID की टीम ने संजय सिंह को दिल्ली की शराब नीति से जुड़े कथित घोटाले केस में गिरफ़्तार किया था |

संजय सिंह सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद अप्रैल 2024 में जेल से बाहर आयें थे |
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