1. कॉलेजन प्रोटीन के ज्यादा प्रोडक्शन से पैंक्रियास की बीटा सेल प्रभावित होती हैं |
2. इस प्रोटीन का नॉर्मल से ज्यादा होना ब्लड शुगर कंट्रोल में दिक्कत कर सकता है |
3. जिन्हें पहले से डायबिटीज है, यह प्रोटीन उनकी परेशानियां बढ़ा सकता है |
टाइप 2 ब्लड शुगर रिक्स : डायबिटीज के मामले दुनिया भर में बढ़ती जा रही हैं डायबिटीज, एक्सपर्ट्स का मानना है की आने वाले कुछ दशकों में डायबिटीज महामारी की तरह फैल जाएगी और करोड़ों की संख्या में लोग इस बीमारी के चपेट मे आ जायेंगे | डायबिटीज खास तौर पर दो तरह की होती है- टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज | टाइप 1 डायबिटीज ऑटो इम्यून बिमारी है और इसकी वजह जेनेटिक फैक्टर्स भी हो सकते हैं | हालांकि टाइप 2 डायबिटीज के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है | आई आई टी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने हाल ही में टाइप-2 डायबिटीज से जुड़ी एक चौंकाने वाली खोज की है | IIT बॉम्बे की नई रिसर्च में पता चला है कि, हमारे शरीर में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन कोलेजन डायबिटीज को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है | कोलेजन एक ऐसा प्रोटीन है, जो शरीर के टिशूज को संरचना देता है और उन्हें मजबूत बनाए रखता है | यह प्रोटीन पैंक्रियास में एक खास हार्मोन ऐमिलिन को तेजी से जमा करता है | जमा होने की प्रक्रिया से पैंक्रियास की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है, जिससे इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है और ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है | यह स्थिति टाइप- 2 डायबिटीज को जन्म देती है या पहले से मौजूद स्थिति को और बिगाड़ती है | यह रिसर्च जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुई है | इसमें यह भी बताया गया है कि, जब ब्लड शुगर बढ़ता है, तो शरीर केवल इंसुलिन ही नहीं बनातती है बल्कि, ऐमिलिन नामक हार्मोन भी बनाती है, जो भोजन के बाद शुगर को कंट्रोल करता है | शोधकर्ताओं ने देखा कि जब ऐमिलिन का निर्माण असामान्य होता है, तो वह आपस में चिपक कर गुच्छे सा तैयार कर लेती है, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में एमेलॉयड एग्रीगेट्स कहा जाता है | गुच्छे पैंक्रियास की बीटा कोशिकाओं को क्षति पहुंचाती हैं, जिससे इंसुलिन बनना और भी कम हो जाता है | इस शोध ने फाइब्रिलर कोलेजन 1 नामक प्रोटीन की भूमिका भी सामने आई है, जो की इन हार्मोन के गुच्छों को जमा करने में मदद करता है | IIT बॉम्बे के बायो साइंसेज और बायो इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर समिक सेन की अध्यक्षता में हुई इस रिसर्च से यह निष्कर्ष निकाली गई कि कोलेजन-1 के बढ़ने से डायबिटीज की खतरा में इजाफा हो सकता है | निष्कर्ष से वैज्ञानिकों को यह समझने में सहयोग मिलेगी कि टाइप- 2 डायबिटीज की जड़ में केवल ब्लड शुगर ही नहीं, बल्कि शरीर की संरचनात्मक प्रोटीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है | यह रिसर्च भविष्य में ऐसी नई दवाओं के विकास का नया रास्ता खोल सकती है, जो की कोलेजन और ऐमिलिन के असंतुलन को नियंत्रित कर पैंक्रियास की कार्य क्षमता बनाये रखने में सहयोग करेंगी | इससे टाइप-2 डायबिटीज के इलाज की दिशा में नई उम्मीद जगी है |
