Loading latest news...

झारखंड का एक गांव, 7 दशक से हिंदू परिवार मना रहा मुहर्रम, गांव मे एक भी मुस्लिम नहीं

झारखंड : चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड के हेड़ुम गांव का एक हिंदू परिवार जो आपसी एकता का बने मिसाल | कामाख्या सिंह भोगता का परिवार 71 वर्षों से मुहर्रम का पर्व मनाते आ रहे है | इस गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है | ये परिवार मुहर्रम के साथ रमजान की रोजा भी रखते है, ईद, बकरीद समेत अन्य समस्त मुस्लिम पर्व मनाते है | मुहर्रम में ताजिया तैयार करने में पूरे परिवार के साथ-साथ गांव के लोगो का भी सहयोग रहता हैं | परिवार की ओर से बाजे के साथ मुहर्रम का जुलूस निकाला जाता है | इस वर्ष भी मुहर्रम की दसवीं को परिवार के सदस्य जुलूस निकालेंगे, जिसमें गांव के लोग भी सहयोग करेंगे | मुहर्रम के जुलूस में हिंदू और मुसलमान शामिल होते हैं और आपसी एकता का परिचय देते हैं | जुलूस गांव से निकलकर कल्याणपुर बाजारटांड़ पहुंचता है, जहां मेला का आयोजन किया जाता है | मेले में दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं और खरीदारी और मेला का आनंद लेते हैं | गांव के युवक पैकाह बनते हैं, कमर में घुंघरू बांध दौड़ लगाते हैं | जुलूस के दौरान लाठी खेल का करतब भी दिखाते हैं, जुलूस देखने के लिए प्रखंड के कई गांवों के लोग पहुंचते हैं
कामाख्या सिंह भोगता का परिवार तीन पीढ़ी से मुहर्रम मनाता आ रहा है | उनके मुताबिक मुहर्रम की शुरुआत उनके दादा स्व बंधु गंझू ने की थी | दादा के निधन के बाद पिता जुगती गंझू ने परंपरा को आगे बढ़ाया, अब वह परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं |
कामाख्या सिंह का कहना है की दादा की जब भी कोई संतान होती थी, तो जन्म लेते ही उसकी मौत हो जाती थी, इससे दादा काफी चिंतित थे | इसी चिंता में वह पुत्र और बहू को लेकर गांव छोड़ कहीं जा रहे थे, चारू के जंगल में एक बरगद पेड़ के नीचे कुछ देर के लिए आराम कर रहे थे, तभी बरगद पेड़ के पास एक फकीर आया, उसने परेशानी और गांव छोड़ने का कारण पूछा, दादा ने पूरी घटना की जानकारी दी | जिसपर फकीर ने मुहर्रम, ईद, बकरीद और अन्य मुस्लिम त्योहार मनाने की बात कही, उसके बाद परिवार वाले वापस गांव लौट चले और फकीर की बात मान मुस्लिम त्योहार मनाना शुरू किया | उनके पिता के पांच भाई और चार बहन हुवे, फिलहाल परिवार में लगभग 100 से अधिक सदस्य हैं | गजब ये है की एक ही कैंपस में मंदिर और मस्जिद दोनों है | मस्जिद में अजान और मंदिर में आरती तथा हिंदू त्योहार, पूजा-पाठ के साथ-साथ मुस्लिम त्योहार भी मनाते हैं | पूरे जिले में यह मंदिर और मस्जिद एकता की मिसाल है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!