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‘मुर्गे को भी शर्म आ जाए’, बंगाल की वन मंत्री ने राज्य के सरकारी अस्पतालों के खाने पर कसा तंज

पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल की वन मंत्री बीरबाहा हांसदा ने सरकारी अस्पतालों में परोसे जा रहे घटिया खाने को लेकर तंज कसा है | उन्होंने मरीजों के भोजन की तस्वीर शेयर कर लिखा “मुर्गे को भी शर्म आ जाए” मंत्री के इस पोस्ट ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल चिन्ह लगा दी हैं, वहीं सत्ताधारी पार्टी में आंतरिक मतभेद की ओर इशारा किया है |

पश्चिम बंगाल की वन मंत्री बीरबाहा हांसदा ने शुक्रवार को सोशल मेडिया व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए सरकारी अस्पतालों में मिलने वाले भोजन की शुद्धता पर सवाल खड़ी कर दी हैं | बीरबाहा हांसदा ने एक तस्वीर साझा करते हुए तीखी कटाक्ष किया “मुर्गे को भी शर्म आ जाए” उनका यह बयान अपनी ही सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस TMC के भीतर भी हलचल का कारण बन गया है | बीरबाहा हांसदा ने अपने स्टेटस में अस्पताल के खाने की एक तस्वीर साझा की जिसमें बेहद खराब हालत में परोसे गये भोजन को दिखाया गया था, उन्होंने लिखा, “जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रेरणा से कैंटीन में 5 रुपये में अंडा-चावल का भरपेट खाना मिल रहा है” वहीं अस्पताल में गरीबों को यह भोजन दिया जा रहा है, यह वाकई शर्मनाक है | इस टिप्पणी ने भाजपा को तंज कसने का मौका दे दिया और तुरंत प्रतिक्रिया दी गई, पार्टी के उपाध्यक्ष देवाशीष कुंडू ने कहा, जब बीरबाहा हांसदा रोगी कल्याण समिति की अध्यक्ष थीं, तब भोजन की गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया, अब जब वह उस पद पर नहीं हैं, तब आलोचना क्यों ? क्या यह पार्टी के भीतर गुटबाज़ी का परिणाम है ? उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि TMC के भीतर भी असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं | एक मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार के सिस्टम की आलोचना करना, प्रशासनिक असंतुलन और जवाबदेही की गंभीर कमी को दर्शाता है | बीरबाहा की टिप्पणी ने एक बार फिर से राज्य के सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत पर ध्यान केंद्रित कर दिया है | भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें मिलती आ रही थी, अब तो खुद सरकार के मंत्री की टिप्पणी ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है |

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