कीचड़ से भरे नाले में मिला सामान, पूरे बंगाल में मच गया बवाल, क्या बिहार चुनाव वाली हो रही बात ?
कोलकाता : पीएम भारत न्यूज़, पश्चिम बंगाल के मदारीहाट इलाके में नाले के कीचड़ में बिखरे हुवे वोटर ID कार्डों ने पूरे राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया है | घटना के बाद बंगाल की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक बवाल मचा हुआ है |सबसे बड़ी बात यह है कि इस मामले को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण “Special Intensive Revision-SIR” से जोड़कर देखा जा रहा है | जहां लाखों मतदाता वोटर लिस्ट से गायब होने का खतरा मंडरा रहा है, वहीं इस मुद्दे पर भारी बवाल मचा हुआ है | मदारीहाट के रवींद्रनगर से देवधारी की ओर जाने वाले रास्ते में एक छोटे पुल के नीचे नाले में बिखरे हुवे वोटर कार्ड सबसे पहले स्थानीय निवासियों की नजर में आई, कार्ड कीचड़ में पड़े थे और उन पर मिट्टी जमी हुई थी. खबर फैलते ही मौके पर भारी भीड़ जुट गई | स्थानीय सूत्रों के मुताबिक अब तक 35 वोटर ID कार्ड बरामद कियें जा चुके हैं | इनमें से 31 कार्ड मदारीहाट के मतदाताओं के हैं |जबकि बाकी बीरपाड़ा, धूपगुड़ी और नागराकाटा के नागरिकों के हैं |स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ कार्डों पर फालाकाटा ब्लॉक का पता भी दर्ज है | वहीं मदारीहाट थाने की पुलिस यह जांच कर रही है कि ये कार्ड पुराने नष्ट कियें जाने वाले दस्तावेज हैं या फिर किसी प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा हैं | इस पूरे प्रकरण ने चुनाव सिस्टम की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं |
बिहार में जारी SIR यानी “Special Intensive Revision” प्रक्रिया को लेकर व्यापक विरोध हो रहा है |क्योंकि लाखों वैध मतदाताओं के नाम लिस्ट से गायब होने का डर है | अब बंगाल में नाले में पड़े वोटर कार्डों ने उस घमासान की यादें ताजा कर दी हैं | राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना की गंभीरता इसलियें और बढ़ जाती है क्योंकि यह चुनाव पूर्व संवेदनशील समय में हुई है | तृणमूल और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप जोर शोर से शुरू हो गया है | घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने एक-दूसरे पर सवाल उठाना शुरू कर दियें हैं |भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सरकारी तंत्र की विफलता है, जबकि तृणमूल इसे विरोधियों की “राजनीतिक साजिश” बता रही है | दोनों दलों ने मतदाता सूची की सुरक्षा और पारदर्शिता का मांग कर रहे है |
मदारीहाट पुलिस ने सभी बरामद वोटर कार्डों को अपने कब्जे में ले लिया है, और जांच शुरू कर दी है | चुनाव आयोग को भी इस मामले की जानकारी दी गई है | उधर स्थानीय लोग गुस्से में हैं और जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी अहम दस्तावेज नाले में कैसे फेंक दिया गया है | यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट मानी जा रही है |
