कांग्रेस कि टेंशन बिहार चुनाव से पहले, साथी दलों ने बढ़ाया कदम खींचने का दबाव : RJD भी छुड़ा रही हाथ
पीएम भारत न्यूज़ ; जो हौ सच
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रि और मंत्रियों के 30 दिन तक हिरासत में रहने के बाद उन्हें पद से हटाने का प्रावधान करने वाले तीन विवादित विधेयकों पर विचार के लियें गठित संयुक्त संसदीय समिति “JPC” में शामिल होने के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने अब कांग्रेस पर ही दबाव बढ़ा दिया है | समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना “UBT” जैसे सहयोगी दल जहां इस समिति का बहिष्कार कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस समिति में शामिल होना चाह रहे है, लेकिन साथी दलों के आह्वान से अब कांग्रेस नेतृत्व दबाव में आ गया है | कांग्रेस के साथी दलों ने कहा है कि इस बिल पर उनका विरोध बहुत मजबूत है और “JPC” कोई खास बदलाव नहीं करने वाला है

बड़ी बात ये है कि, बिहार विधानसभा चुनाव से अचानक पहले इंडिया गठबंधन के अंदर यह रस्साकशी उभरी है | कांग्रेस के लियें दूसरी बड़ी समस्या यह है कि बिहार में उसकी सबसे बड़ी सहयोगी राजद भी अब सपा-टीएमसी और शिवसेना की तरह “JPC” का बहिष्कार करने की योजना बना रही है | राजद का यह स्टैंड कांग्रेस के स्टैंड से ठीक उलटा है | इससे कांग्रेस की मुश्किले और बढ़ती जा रही है | जबकि, “DMK” ने कांग्रेस को राहत दी है और “JPC” में शामिल होने का फैसला किया है |

कांग्रेस की प्लानिंग
“ET” की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि “DMK” के “TKS” एलंगोवन ने कहा है कि उनकी पार्टी ने बिल के विरोध करने और उसे दर्ज कराने के लियें “JPC” में शामिल होने का फैसला लिया है | वहीं कांग्रेस के एक सांसद ने कहा कि, “हमारे पास यह सोचने के उपयुक्त कारण हैं कि “JPC” में शामिल होना कैसे उपयोगी हो सकता है | उन्होंने कहा कि हम हर किसी को भाजपा के खिलाफ एक साथ ले जाना चाहते हैं

विपक्षी दल कह रहे JPC बेमतलब
दरअसल इंडिया गठबंधन में शामिल रही “आम आदमी पार्टी” ने भी तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ही तरह “JPC” में अपने सदस्य नामित नहीं करने का फैसला लिया है | हालांकि, वामपंथी दलों ने अपनी स्थिति अस्पष्ट नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ है और “JPC” में अपना विरोध दर्ज कराना चाहती हैं | कई विपक्षी दलों ने कहा है कि इस मुद्दे पर “JPC” बेमतलब है |

